MRTT: हिंद-प्रशांत में भारत की बढ़ेगी पहुंच, 10 हजार करोड़ का बड़ा रक्षा सौदा

MRTT: भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है. देश के डिफेंस सिस्टम को आधुनिक बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है. राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद से लेकर एयर डिफेंस नेटवर्क तक सरकार भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है. मिशन सुदर्शन चक्र के तहत 2035 तक पूरे देश को हवाई हमलों से सुरक्षित बनाने की योजना है. इसी क्रम में केंद्र सरकार ने भारतीय वायु सेना की ताकत बढ़ाने के लिए एक बेहद अहम फैसला लिया है. छह नए मल्टीरोल टैंकर ट्रांसपोर्ट विमानों की खरीद को मंजूरी देकर भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह लंबी दूरी के हवाई अभियानों में किसी भी तरह की कमजोरी नहीं चाहता. यह फैसला बदलते वैश्विक हालात और क्षेत्रीय सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
MRTT सौदे से मिलेगी रणनीतिक बढ़त
एयर टू एयर रिफ्यूलिंग क्षमता को मजबूत करने के लिए छह MRTT विमानों की खरीद को हरी झंडी दी गई है. इस सौदे की अनुमानित लागत लगभग एक दशमलव एक अरब अमेरिकी डॉलर बताई जा रही है. इन विमानों की मदद से लड़ाकू विमान बिना जमीन पर उतरे हवा में ही ईंधन भर सकेंगे. इससे लंबे मिशनों के दौरान राफेल Su 30 MKI और तेजस जैसे विमानों को बड़ी राहत मिलेगी. रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि ये विमान भारतीय वायु सेना के लिए फोर्स मल्टीप्लायर साबित होंगे. हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पहुंच और प्रभाव भी इससे काफी बढ़ेगा. इस कार्यक्रम का नेतृत्व इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज कर रही है जबकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की इसमें अहम भूमिका होगी. यह साझेदारी भारत को तकनीकी रूप से भी मजबूत बनाएगी.

पुराने टैंकर विमानों की जगह आधुनिक तकनीक
फिलहाल भारतीय वायु सेना के पास रूसी मूल के Il 78 MKI टैंकर विमान हैं जो वर्ष दो हजार तीन में शामिल किए गए थे. ये विमान अब अपनी सेवा के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं. बढ़ती मेंटेनेंस लागत और सीमित उपलब्धता के कारण इनकी उपयोगिता कम होती जा रही है. आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ तकनीकी तालमेल की कमी भी एक बड़ी समस्या बन चुकी है. ग्लोबल स्तर पर हुए विश्लेषण में भी इन विमानों की विश्वसनीयता में गिरावट सामने आई है. ऐसे में MRTT विमानों की खरीद को समय की जरूरत माना जा रहा है. नए MRTT विमान ज्यादा ईंधन ले जाने में सक्षम होंगे और लंबी दूरी तक उड़ान भर सकेंगे. इनकी गति और रेंज मौजूदा विमानों से कहीं बेहतर होगी.
आत्मनिर्भर भारत और भविष्य की तैयारी
इस सौदे में HAL की भूमिका इसे और खास बनाती है. HAL न सिर्फ इन विमानों में भारतीय सिस्टम लगाएगा बल्कि देश के अंदर ही इनके रखरखाव और मरम्मत की व्यवस्था भी तैयार करेगा. इससे विदेशी निर्भरता कम होगी और आत्मनिर्भर भारत मिशन को मजबूती मिलेगी. रक्षा जानकारों का मानना है कि MRTT विमानों की तैनाती से चीन और पाकिस्तान दोनों के खिलाफ भारत की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी. हिंद महासागर क्षेत्र में सतत निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो पाएगी. स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही वायु सेना के लिए यह सौदा बड़ी राहत लेकर आएगा. कम संसाधनों में भी ज्यादा प्रभावी ऑपरेशन किए जा सकेंगे. कुल मिलाकर यह खरीद भारतीय वायु सेना के लिए सिर्फ तकनीकी उन्नयन नहीं बल्कि एक दूरगामी रणनीतिक कदम है जो आने वाले वर्षों में देश की सुरक्षा को नई दिशा देगा.